Monday, May 25, 2026

🧭🔮🎃🥇 उत्तराखण्ड वह रहस्यमई चुड़ैल डाकिन सोनका जो लोगों को सोना व(Gold 🥇) देकर धीरे धीरे प्राण ले लेती है। सावधान हो जाएं 🎃 अगर आप उत्तराखण्ड के ख़ुबसूरत वादियों में घुम रहे हैं तो सतर्क हो जाएं 🎃

Ek yatra khajane ki khoje




 

       वह बुढ़िया भी हो सकती है और जवान सुंदर सोनका 
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🧭🔮🎃🥇 🧭🔮🎃🥇 उत्तराखण्ड वह रहस्यमई चुड़ैल डाकिन सोनका जो लोगों को सोना (Gold 🥇) देकर धीरे धीरे प्राण ले लेती है। सावधान हो जाएं 🎃 अगर आप उत्तराखण्ड के ख़ुबसूरत  वादियों में घुम रहे हैं तो सतर्क हो जाएं 🎃




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🙏🙏 नमस्कार दोस्तों 

 मैं पर्वतारोही हूं और साल का अधिकांश समय मैं उत्तराखंड में ही घुमता रहता हूं अपने दोस्तों के साथ। दोस्तों मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी उत्तरकाशी के असी गंगा घाटी में कि मुझे पुर्ण विश्वास हो गया कि हकीकत में सोनका एक ऐसी चुड़ैल डाकिन जो कुछ खाने के बदले लोगों को सोना (Gold) देती थीं। और लोगों को अपनी जाल में फंसाकर उनकी जान लें लेती थी।
             दोस्तों वह मुझे भी अपनी जाल में फंसाना चाहती थी लेकिन किसी अंजान शक्ति ने मुझे उसके चंगुल में फसने से बचा लिया था।

         दोस्तों उत्तर काशी में असी गंगा नदी के घाटी में काफलोन नामक एक जगह है जहां पर टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन का एक ट्रेनिंग कैंप बना हुआ है जहां पर टाटा स्टील के कर्मचारियों को लीडरशिप की ट्रेनिंग होती हैं और साथ ही साथ बहुत सारे एडवेंचर एक्टिविटी होती है और उन्हें ऊंचे पहाड़ों पर ट्रैकिंग भी कराया जाता है।। 





                   दोस्तों अभी मई महीने 2026 में टाटा स्टील जमशेदपुर की 49 सदस्यों का एक ग्रुप आया हुआ था काफलोन में जिन्हें रिवर क्रौस करवाने की ट्रेनिंग देनी थी। इसके लिए हमलोगों ने असी गंगा के जलधारा में एक स्थान 
बना रखा था जहां उन्हें ट्रेंनिंग देनी थी।।

         अंततः वह दिन भी आ गया उस दिन रविवार का दिन था तो उस रोड में गाडियां बहुत ही कम चलती है ख़ास तौर पर रविवार के दिन। खैर गाडियां चलें या न चले क्योंकि हमें कहीं जाना तो था नहीं। क्योंकि हमें पैदल ही करीब एक किलोमीटर के आस पास ही ट्रेनिंग स्थान के पास जाना था।
दोस्तों हमारे ट्रेंनिग स्थान के उपर करीब एक किलोमीटर दूर उतरो गांव मौजूद हैं जहां जाने के लिए लोहे वाली पुल बनीं हुईं हैं। दोस्तों पुल के उस पार और उतरो गांव के नीचे पहाड़ों में जंगल के बीच में हमलोगों ने राॅक क्लाइंबिंग क्षेत्र बना रखा है । जहां पर लोगों को पहाड़ पर चढ़ने और उतरने की ट्रेनिंग दी जाती है।
                 दोस्तों राॅक क्लाइंबिंग क्षेत्र के नीचे हीं असी गंगा बहती हैं जहां पर हमलोगों को नदी के तेज़ जलधारा में नदी पार करने की ट्रेनिंग देनी थी।
                                      अतः दोस्तों हम लोग तय समय पर अपने कैंप क्षेत्र काफलोन से नास्ता करने के बाद सभी पार्टिसिपेंट्स के साथ 9 बजे ट्रेनिंग स्थल की ओर चल पड़े थे। और लगभग आधे घंटे में ही सभी लोग नदी के किनारे पहुंच गए। दोस्तों आपको बता दूं कि कुछ पार्टिसिपेंट्स का राॅक क्लाइंबिंग बचा हुआ था जिन्हें लेकर मुझे नदी के उस पार जाना था। जहां उन्हें ट्रेंनिंग स्थान पर छोड़ कर नदी के दुसरे किनारे पर ही रूक जाना था। जहां पर रीवर क्रौसिंग के दौरान पार्टिसिपेंट्स को सुरक्षित नदी के उस पार भेजना था। अतः मेरे उस स्थान पर पहुंचने के बाद ट्रेनिंग शुरू कर दी गई। दोस्तों एक एक करके सभी पार्टिसिपेंट्स को सुरक्षित ट्रेनिंग देने के बाद। मैं वापस उसी लोहे वाले पुल से नदी के इस पर आने से लगा जहां पर मेरे दोस्त मेरा इंतजार कर रहे थे। दोस्तों इस समय 12 बज रहे थे। काफी तेज धूप थी अतः में काफी तेज कदमों से पुल को पार करने लगा। 





                                                    दोस्तों जैसे ही मैं पुल से नीचे उतर कर रोड पर आया मैं अचानक रुक गया क्योंकि की एक बेहद वृद्धावस्था वाली महिला ने आवाज देकर मुझे रोक दिया था। दोस्तों आपको क्या बताऊं मैं उसे देखते ही मैं डर गया था क्योंकि वह पुरी तरह से सोने की गहने से लदी हुई थी। इस वीराने में। जहां दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं थी। क्योंकि उस स्थान से उतरो गांव और हमारा कैंप भी लगभग एक किलोमीटर दूर था। और सबसे बड़ी बात यह थी कि लगभग पच्चीस क़दम पर ही मेरे दोस्त और सारे पार्टिसिपेंट्स खड़े थे लेकिन वह बुढ़ी महिला उन्हें दिखाई नहीं दे रहीं थीं। वह रहस्यमई तरीके से मुस्कुरा रही थी और मुझसे अपनी पहाड़ी भाषा में पुछ रहीं थीं कि आज रोड पर गाड़ियां क्यों नहीं चल रही है मुझे अपने रिश्तेदार के घर जाना है। दोस्तों न जाने क्यों मै रहस्यमई तरीके से उसके बातों फंसता जा रहा था।कि तभी मेरे दोस्तों ने मुझे आवाज लगाई। कि किससे बात कर रहे हों काफी तेज धूप हैं चलो कैंप चलते है। अपने दोस्तों की आवाज सुनकर उनकी तरफ देखने लगता हूं और फिर जैसे ही पीछे मुड़कर देखता हूं वह बुढ़ी महिला तेज़ क़दमों से आगे बढ़ जाती है और कुछ कदम चलने के बाद वह मेरे आंखों के सामने से ओझल हो जाती है। 
                                                          यह देखकर मैं आश्चर्यचकित हो जाता हूं कि वह महिला आखीरकार गई कहां। उसके बाद मैं अपने दोस्तों के साथ वापस कैंप आ जाता हूं और मैं अपने दोस्तों को इस बारे मे कोई जानकारी नहीं देता हूं। 
                      धन्यवाद दोस्तों 
दोस्तों अगला भाग ज़रूर पढ़ें। आगे की घटनाएं बहुत ही रहस्यमई है।



















Wednesday, March 25, 2026

2000 साल पहले भी होता था भारत-मिस्र में व्यापार, कब्रों में खुदे मिले तमिल-संस्कृत लिपियों में व्यापारियों के नाम: विदेशी शोधकर्ता भी हैरान, बताया- ये असाधारण खोज🔎🔎🔮🔮

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⚰️⚰️📜📜2000 साल पहले भी होता था भारत-मिस्र में व्यापार, कब्रों में खुदे मिले तमिल-संस्कृत लिपियों में व्यापारियों के नाम: विदेशी शोधकर्ता भी हैरान, बताया- ये असाधारण खोज🔎🔎🔮🔮




मिस्र के कब्र में दफ़न भारतीय व्यापारियों के नाम

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📝📝मिस्र के ‘वैली ऑफ किंग’ नाम की प्राचीन कब्रों से 30 शिलालेख मिले हैं, जो लगभग 2000 साल पुराने हैं। इन शिलालेखों में भारत और मिस्र के बीच व्यापार और संपर्क की जानकारियाँ हैं। 📝📝


📝📝इन शिलाओं पर लिखे शब्द तमिली (प्राचीन तमिल-ब्राह्मी) और प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में हैं, जो यह साबित करते हैं कि उस समय भारतीय उपमहाद्वीप के लोग मिस्र आते-जाते थे।🗺️🗺️


📜📜मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये शिलालेख 6 अलग-अलग रॉक-कट कब्रों में मिले हैं। इनमें से 20 शिलाएँ तमिली में और बाकी 10 शिलाएँ संस्कृत और प्राकृत में हैं।⚰️⚰️


🚸🚸 इसका मतलब यह है कि केवल दक्षिण भारत के ही नहीं बल्कि भारत के उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी हिस्सों से भी लोग मिस्र जाते थे। 🚸🚸






📜📜विशेष रूप से प्राचीन राजधानी थेब्स के भीतर स्थित राजाओं की घाटी में, जहाँ पहले से तीसरी ईस्वी के बीच मसालों और अन्य वसतुओं का व्यापार होता था।🧭🧭


✍️✍️इस खोज की जानकारी स्विट्जरलैंड की लॉजेन यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ स्लाविक एंड साउथ एशियन स्टडीज (SLAS) के प्रोफेसर इंगो स्ट्राउच और फ्रांस के पेरिस स्थित EFEO की प्रोफेसर शार्लोट श्मिड ने दी है। ✍️✍️


✍️✍️उन्होंने बुधवार (11 फरवरी 2026) को तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) द्वारा तमिल शिलालेखों पर आयोजित सम्मेलन में यह जानकारी दी। ✍️✍️


🕵️इस कार्यक्रम में दुनियाभर के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए थे, जहाँ इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज को पहली सार्वजनिक रूप से बताया गया।✍️✍️



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Tuesday, March 24, 2026

दोस्तों वहीं तारें वहीं आकाश बस दोस्तों समय के साथ नजर बदल गई हैं

Ek yatra khajane ki khoje







समय बदल गया सभ्यताओं का स्वरूप बदल गया 

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तारें वहीं मौजूद हैं और आकाश भी वहीं मौजूद हैं 🌠🌫️

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वही तारे, वही आकाश—बस नज़र बदल गई।




एक तरफ रामसेस 5th के मकबरे की छत पर बना 3000 साल पुराना आकाशगंगा का चित्रण है, और दूसरी तरफ आज की अत्याधुनिक एस्ट्रोफोटोग्राफी। समय के इस विशाल अंतर के बावजूद, ब्रह्मांड की विशालता को समझने की हमारी तड़प आज भी कायम है। प्राचीन मिस्रवासियों ने जिसे अपनी दीवारों पर उकेरा, आज हम उसे लेंस के माध्यम से सच होते देख रहे हैं।








🕵️Ek yatra khazane ki khoj me

     TRAVEL WITH MAHENDRA VLOGS 


     





Monday, March 23, 2026

👰 दिल्ली की उजाड़ दुल्हन क्रिस्टल ताबूत में। क्या यह सच्ची घटना थी?

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🫅👰दिल्ली की उजाड़ दुल्हन क्रिस्टल ताबूत में… अब भी अपने अनुष्ठानिक वस्त्रों में लिपटी(नई दिल्ली, 1912)👰

👰प्रस्तावना: क्या आपने कभी सोचा है कि शादी का जोड़ा पहने हुए एक युवती का शव, सौ से अधिक वर्षों तक एक चमकदार क्रिस्टल के ताबूत में सुरक्षित कैसे रह सकता है? क्या यह केवल एक पागल वैज्ञानिक का प्रयोग था या किसी ऐसी प्राचीन बुराई का द्वार, जो आज भी दिल्ली की पुरानी गलियों के नीचे सांस ले रही है? यह कहानी केवल एक 'दुर्भाग्यपूर्ण दुल्हन' की नहीं है, बल्कि उस अंधेरे की है जिसे विज्ञान ने छूने की कोशिश की और खुद राख हो गया।😢

🧛{ 1912: दिल्ली की दो दुनिया और एक रहस्यमयी पत्र}🧟

🧑‍🎄अक्टूबर 1912 की वह सर्द रात थी। ब्रिटिश राज की नई राजधानी दिल्ली अभी निर्माण के दौर से गुजर रही थी। एक तरफ एडविन लुटियंस की नई दिल्ली अपनी भव्यता ले रही थी, तो दूसरी तरफ पुरानी दिल्ली यानी शाहजहानाबाद की संकरी गलियां सदियों के राज दबाए बैठी थीं।🧛🧟

👮उस समय के सबसे अनुभवी पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर रघुनाथ सिंह को एक गुमनाम पत्र मिला। पत्र की लिखावट कांपती हुई थी, जैसे उसे लिखने वाला मौत के करीब खड़ा हो। पत्र में लिखा था:😢

"🙂जो दुल्हन कभी शादी नहीं कर पाई, वह अब भी इंतज़ार कर रही है। चांदनी चौक से तीन गली आगे, नीले दरवाज़े वाली हवेली... तहखाने में वह क्रिस्टल में है। वह देख रही है।"😢



🙂रघुनाथ सिंह ने इसे मज़ाक समझा, लेकिन जब उन्होंने अपने सहयोगी कांस्टेबल मुकुंद लाल को यह दिखाया, तो मुकुंद का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने कांपते हुए कहा, "साहब, इस हवेली को लोग 'अंधेरे का घर' कहते हैं। मेरी दादी कहती थीं कि यहाँ कुछ बहुत बुरा हुआ था।"😢

[. नीले दरवाजे की हवेली और तहखाने का राज]

😾19 अक्टूबर, सूर्यास्त से ठीक पहले, रघुनाथ सिंह और उनकी टीम उस हवेली के सामने खड़ी थी। मुगल और औपनिवेशिक वास्तुकला का वह अजीब मिश्रण डरावना लग रहा था। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, एक ऐसी हवा बाहर निकली जैसे घर ने आखिरी सांस छोड़ी हो। हवा में सीलन और किसी पुराने विदेशी इत्र की गंध थी।😢

🙂जब वे तहखाने की ओर बढ़े, तो सीढ़ियां पत्थर की बनी थीं और हर कदम पर एक खोखली गूंज पैदा करती थीं। नीचे का तापमान ऊपर से कहीं ज्यादा कम था। वहां एक भारी लोहे का दरवाजा था, जिस पर जंग तो लगी थी, लेकिन ताला एकदम नया था।😢

😾जब ताला तोड़ा गया, तो जो मंजर सामने था उसने सबकी रूह कंपा दी। कमरे के बीचों-बीच एक क्रिस्टल का ताबूत रखा था। वह पारदर्शी था और उसके अंदर एक दुल्हन लेटी थी—लाल रेशमी लहंगा, भारी सोने के आभूषण, हाथों में ताजी रची मेहंदी और माथे पर बिंदी। उसका चेहरा एक बेहद महीन घूंघट से ढका था। सबसे डरावनी बात यह थी कि 100 साल बाद भी शरीर सड़ा नहीं था। वह ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी-अभी सोई हो।😢




😾. डॉ. एडवर्ड ब्लैकवुड: विज्ञान या पागलपन?😢

😾वहां मिली अलमारियों से रघुनाथ सिंह को दर्जनों किताबें और दस्तावेज मिले। उनमें से एक थी डॉ. एडवर्ड ब्लैकवुड की डायरी (1909-1912)। ब्लैकवुड एक ब्रिटिश डॉक्टर था जो मौत की प्रक्रिया को रोकने के प्रयोग कर रहा था।😢

😌उसकी डायरी के पन्ने किसी शैतानी योजना की गवाही दे रहे थे:😾

[(जुलाई 1910: उसने लिखा कि उसने हिमालय के योगियों और तिब्बत के लामाओं से शरीर को संरक्षित रखने की विधि सीखी है।)]👰👰🧟🧟😢😢





Wednesday, March 18, 2026

घुमक्कड़ पर्वतारोही महेंद्रा (travel with Mahendra vlogs)

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Tuesday, November 4, 2025

पलचान मनाली के पास स्थित एक शांत और सुंदर पहाड़ी गाँव है - हिमाचल प्रदेश भारत 🇮🇳

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अगर आप घूमने के शौखिन हैं तो हिमाचल प्रदेश में मे मौजूद मनाली के पालचन गांव अवश्य आए 





 


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पलचान मनाली के पास स्थित एक शांत और सुंदर पहाड़ी गाँव है जहाँ ब्यास नदी, देवदार के जंगल और बर्फीली पहाड़ियाँ मिलकर बहुत सुकून वाला माहौल बनाते हैं। मनाली की भीड़ से थोड़ा दूर होने के कारण यहाँ प्रकृति, शांति और स्थानीय पहाड़ी जीवन का असली अनुभव मिलता है।


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मनाली मॉल रोड से पलचान की दूरी लगभग 9 किलोमीटर है। भुंतर एयरपोर्ट से पलचान लगभग 55 किलोमीटर है और करीब 1.5 से 2 घंटे में पहुँचते हैं। सोलंग वैली यहाँ से सिर्फ 3 किलोमीटर पर है और अटल टनल का दक्षिण प्रवेश द्वार लगभग 9 किलोमीटर पर, इसलिए इसे इन दोनों जगहों के बीच आदर्श स्टे लोकेशन माना जाता है।



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यहाँ ब्यास नदी के किनारे सुबह शाम टहलना बहुत शांत अनुभव देता है। पलचान एडवेंचर एक्टिविटी के लिए भी अच्छा बेस है क्योंकि सोलंग नजदीक है। 

रुकने के लिए पलचान में अच्छे व्यू वाले होमस्टे और रिसॉर्ट मिल जाते हैं जो कपल, फैमिली और ग्रुप सभी के लिए सही हैं। घूमने का अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से दिसंबर तक माना जाता है। दिसंबर से फरवरी में यहाँ अच्छी बर्फबारी होती है और पूरा गाँव सफेद चादर में ढक जाता है।








अगर आप मनाली की भीड़ से हटकर शांत, प्राकृतिक और असली पहाड़ी माहौल में समय बिताना चाहते हैं तो पलचान एक बढ़िया जगह है जहाँ प्रकृति, शांति और पहाड़ी लाइफ का सुंदर मेल देखने को मिलता है।












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एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग

          ( एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग )                          www.AdventurSport.com सभी फोटो झारखणड़ के...