Saturday, October 16, 2021

एक यात्रा पौराणिक भारत के अद्भुत रहस्यों की ओर महाभारत काल अद्भुत युद्ध रणनीति चक्र व्यूह A Journey Towards the Amazing Mysteries of Mythical India Mahabharata Era Amazing War Strategy Chakra Vyuha.

Ek yatra khajane ki khoje










                             चक्र व्यूह 









  नमस्कार दोस्तों मैं माउंटेन लैपर्ड महेंद्रा आप सभी लोगों का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। दोस्तों क्या आपको पता है एक जटिल और खतरनाक पौराणिक युद्ध रणनीति के बारे में जिसे हम सभी चक्र व्यूह के नाम से जानते हैं। दोस्तों इस प्राचीन युद्ध रणनीति ने महाभारत के इतिहास को ही बदल के रख दिया था।







                     चक्र व्यूह

 नमस्कार दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ब्रह्मांड का सबसे बड़ा और भयंकर महायुद्ध था, महाभारत काल के कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के साथ हुआ यह महासंग्राम। दोस्तों आप सभी जानकर अचंभित रह जाएंगे कि इतिहास में इतना भयंकर महायुद्ध केवल एक ही बार पौराणिक महाभारत काल में हुआ था।






  दोस्तों इतिहासकारों एवं वैज्ञानिकों का मानना है कि महाभारत काल में कुरुक्षेत्र युद्ध स्थल पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

 दोस्तों आप सभी को पता ही होगा चक्र व्यूह के बारे में जो कि अपने समय का एक महानतम युद्ध कला था। दोस्तों यदि कोई दुश्मन युद्ध कला के इस महानतम चक्र व्यूह के अंदर फंस जाएं तो उसका इस चक्र व्यूह के अंदर से निकलना नामुमकिन हो जाता था। और अंत में वह चक्र व्यूह के अंदर ही मारा जाता था । जैसा कि महाभारत काल के एक महान योद्धा अर्जुन पुत्र राजकुमार अभिमन्यु के साथ हुआ था।





                                
           दोस्तों चक्र यानी "पहिया " और "व्यूह"  यानी "गठन"   दोस्तों पहिए की जैसा घुमता हुआ "व्यूह" है चक्रव्यूह ।

  दोस्तों कुरूक्षेत्र युद्ध स्थल का सबसे ख़तरनाक रणतंत्र था "चक्र व्यूह"


      दोस्तों यद्यपि आज का आधुनिक जगत भी चक्रव्यूह जैसे रणतंत्र से अनभिज्ञ है। दोस्तों पौराणिक काल में भी चक्रव्यूह या पद्म व्यूह भी को भेदना असंभव था ।दोस्तों द्वापर युग में केवल 7 महायोद्धा ही इसे भेदना जानते थे। दोस्तों उनमें से थे स्वयं भगवान कृष्ण और अर्जुन ,भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कर्ण ,अश्वत्थामा और प्रद्युमन ही चक्रव्यू को भेद  सकते थे।अर्जुन पुत्र महायोद्धाअभिमन्यु केवल चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करना जानता था।









 (  दोस्तों आइए जानते हैं चक्रव्यूह के बारे में )


  दोस्तों पौराणिक काल में रणक्षेत्र में चक्रव्यूह की रचना अपने दुश्मनों को हराने  के लिए किया जाता था। दोस्तों चक्रव्यू में कुल सात परत होती थी। जिसमें सबसे अंदरूनी परत में सबसे शौर्यवान  सैनिक तैनात होते थे।
                                          दोस्तों इन परतों का निर्माण इस प्रकार किया जाता था। की बाहरी परत के सैनिकों से अंदर की परत के सैनिक  शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा बलशाली होते थे। दोस्तों सबसे बाहरी परत में पैदल सैन्य के सैनिक तैनात हुआ करते थे। एवं अंदरूनी परत में अस्त्र शास्त्र से सुसज्जित हाथियों की सेना हुआ करती थी। दोस्तों चक्रव्यूह की रचना एक भूल -भुलैया जैसी होती थी ।जिसमें एक बार शत्रु फस गया तो उसका निकलना असंभव हो जाता था।

          दोस्तों माना जाता है कि चक्रव्यूह में हर परत की सेना घड़ी के कांटे के जैसे ही हर पल घूमता रहता था। दोस्तों इस कारण से चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करने वाला व्यक्ति अंदर ही खो जाता था ।और बाहर जाने का रास्ता भूल जाता था।

 दोस्तों महाभारत काल में चक्रव्यूह की रचना  गुरु द्रोणाचार्य ही करते थे।

   दोस्तों महाभारत काल में चक्रव्यूह को उस युग का सबसे सर्वश्रेष्ठ सैन्य दल दल माना जाता था ।दोस्तों माना जाता है कि इस खतरनाक चक्रव्यूह की रचना महाराज युधिष्ठिर को बंदी बनाने के लिए ही किया गया था।







      दोस्तों माना जाता है कि 48 × 128 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ कुरुक्षेत्र यानी आज का आधुनिक हरियाणा का क्षेत्र में ही यह महायुद्ध हुआ था ।जिसमें विभिन्न प्रदेशों के लाखों की संख्या में सैनिकों ने भाग लिया था।

             दोस्तों चक्रव्यूह को घूमता हुआ मौत का पहिया भी कहा जाता था ।क्योंकि एक बार जो इस चक्रव्यूह के अंदर गया वह कभी भी बाहर नहीं आ सकता था। दोस्तों आश्चर्यचकित करने वाली बात यह थी, कि यह चक्रव्यू पृथ्वी की तरह ही अपने अक्ष पर घूमता था ।तथा साथ ही साथ हर परत भी परिक्रमा करती हुई घूमती थी। दोस्तों इसी कारण से बाहर जाने के द्वार हर वक्त अलग-अलग दिशा में बदल जाता था ।जो शत्रु को भ्रमित कर देता था ।दोस्तों अद्भुत और अकल्पनीय युद्ध तंत्र था चक्रव्यूह।

    दोस्तों मेरा मानना है कि आज के आधुनिक युग में इतने उलझे हुए और असामान्य रणतंत्र को युद्ध में शामिल नहीं किया जा सकता है।








       दोस्तों जरा कल्पना कीजिए कि सहस्त्र  वर्ष पूर्व चक्रव्यू जैसे घातक युद्ध तकनीक को अपनाने वाले वे योद्धागण कितने बुद्धिमान रहे होंगे।
          
   दोस्तों आप सभी को जानकर आश्चर्य होगा की चक्रव्यू ठीक उस आंधी की तरह था जो अपने मार्ग में आने वाले हर एक वस्तु को तिनके की तरह उड़ा कर नष्ट कर देता था। दोस्तों महाभारत काल में इस चक्रव्यूह को भेदने की जानकारी केवल साथ महा योद्धाओं को ही थी ।दोस्तों अर्जुन पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह के भीतर केवल प्रवेश करना जानता था ।और कुछ ही प्रवेश द्वारों को वह तोड़ना जानता था। वाह चक्रव्यू के अंतिम दरवाजे को तोड़ना नहीं जानता था। इसी कारण बस कौरवों ने छल से महायोद्धा अभिमन्यु की हत्या कर दी थी।

  दोस्तों माना जाता है कि युद्ध में चक्रव्यूह का गठन शत्रु सैन्य को मनोवैज्ञानिक और मानसिक रूप से इतना जर्जर बना देता था। कि एक ही पल में हजारों की संख्या में सैनिक अपने प्राण त्याग देते थे।

 दोस्तों महाभारत काल के महान योद्धाओं में स्वयं भगवान कृष्ण ,धनुर्धर अर्जुन ,भीष्म पितामह ,गुरु द्रोणाचार्य, दानवीर कर्ण ,अश्वत्थामा और प्रधुम्न के अलावा चक्रव्यूह से बाहर निकलने की रणनीति किसी के भी पास नहीं था।






   आपको जानकर आश्चर्य होगा कि संगीत या शंखनाद यानी शंख की आवाज के अनुसार ही चक्रव्यू के सैनिक अपने स्थिति को बदल सकते थे ।दोस्तों कोई भी सेनापति या सैनिक अपनी मर्जी से अपनी स्थिति को बदल नहीं सकता था।
                  दोस्तों अद्भुत और अकल्पनीय सदियों पूर्व भी इतने वैज्ञानिक तरीके से अनुशासित रणनीति का गठन करना सामान्य विषय नहीं था।

    दोस्तों माना जाता है कि महाभारत के युद्ध में कुल 3 बार चक्रव्यू का गठन किया गया था। जिनमें से एक में युवराज अभिमन्यु की मौत हुई थी ।एवं एक में अर्जुन ने भगवान कृष्ण की मदद से चक्रव्यू को तोड़कर जयद्रथ का वध किया था। 









    दोस्तों हमें गर्व करना चाहिए कि हम सभी उस भारतवर्ष के रहने वाले हैं। जिस देश में सदियों पूर्व भी विज्ञान और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलता था।

 दोस्तों युद्ध स्थल का महान रणनीति चक्रव्यूह "ना भूतो ना भविष्यति" युद्ध तकनीक था।

 यानी दोस्तों देखा जाए तो इस युद्ध रणनीति "चक्रव्यूह" को ना भूतकाल में किसी ने देखा और ना भविष्य काल में कोई इसे देख पाएगा।

  दोस्तों आपको बता दूं कि मध्य प्रदेश के एक सुदूर घने जंगलों में और कर्नाटक के एक शिव मंदिर में आज भी चक्रव्यू का एक नक्शा बना हुआ है‌। जिसे आप देख सकते हैं और अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकते हैं।









      दोस्तों आज के लिए बस इतना है।

            धन्यवाद दोस्तों

        माउंटेन लैपर्ड महेंद्रा 🧗🧗
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             English translate
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          चक्र व्यूह की संरचना







            

 Hello friends, I am Mountain Leopard Mahendra, warm greetings to all of you.  Friends, do you know about a complex and dangerous mythological war strategy which we all know by the name of Chakra Vyuha.  Friends, this ancient war strategy had changed the history of Mahabharata itself.


                           Trap  (  Chakravyuh )


 Hello friends, you will be surprised to know that the biggest and fiercest war of the universe was, this great battle happened with Kauravas and Pandavas in Kurukshetra of Mahabharata period.  Friends, all of you will be surprised to know that such a fierce war in history happened only once in the mythological Mahabharata period.


 Friends, historians and scientists believe that nuclear weapons were used at the Kurukshetra war site during the Mahabharata period.











 Friends, all of you must know about Chakra Vyuh, which was one of the greatest martial arts of its time.  Friends, if an enemy gets trapped inside this greatest Chakra Vyuha of martial arts, then it was impossible to get out of this Chakra Vyuha.  And in the end he was killed inside the Chakra Vyuha itself.  As happened to Prince Abhimanyu, son of Arjuna, a great warrior of the Mahabharata period.



 Friends Chakra means "wheel" and "Vyuh" means "formation".


 Friends, the most dangerous battle of Kurukshetra battle site was "Chakra Vyuh".









 Friends, although today's modern world is also ignorant of battles like Chakravyuh.  Friends, even in the mythological period, it was impossible to pierce Chakravyuh or Padma Vyuh. Friends, in the Dwapar era, only 7 great warriors knew how to penetrate it.  Friends were among them Lord Krishna himself and Arjuna, Bhishma Pitamah, Dronacharya, Karna, Ashwatthama and Pradyumna could penetrate the chakravyu.



 (Friends, let's know about Chakravyuh)



 Friends, in the mythological period, Chakravyuh was created in the battlefield to defeat its enemies.  Friends, there were a total of seven layers in the Chakravyu.  In which the most brave soldiers were stationed in the innermost layer.

 Friends, these layers were constructed in this way.  The soldiers of the inner layer were physically and mentally stronger than the soldiers of the outer layer.  Friends, infantry soldiers used to be stationed in the outermost layer.  And in the inner layer there used to be an army of elephants equipped with weapons.  Friends, the composition of Chakravyuh was like a maze. In which once the enemy got trapped, it became impossible to get out.









 Friends, it is believed that in the Chakravyuh, the army of each layer used to rotate every moment like the fork of the clock.  Friends, for this reason the person entering the Chakravyuh used to get lost inside and forget the way to go out.


 Friends, in the Mahabharata period, only Guru Dronacharya used to compose Chakravyuh.


 Friends, in the Mahabharata period, Chakravyuh was considered to be the best military team of that era. Friends, it is believed that this dangerous Chakravyuh was composed only to take Maharaj Yudhishthira captive.


 Friends, it is believed that this great war took place in Kurukshetra, spread over an area of ​​48 × 128 km, in the area of ​​today's modern Haryana. In which lakhs of soldiers from different regions participated.











 Friends, Chakravyuh was also called the spinning wheel of death. Because once one who went inside this Chakravyuh could never come out.  Friends, the surprising thing was that this Chakravyu used to rotate on its axis just like the Earth. At the same time, every layer also revolved around.  Friends, for this reason, the door to go out used to change in different directions all the time. Which confused the enemy. Friends, the wonderful and unimaginable battle system was Chakravyuh.


 Friends, I believe that in today's modern era, such a complicated and unusual war system cannot be involved in war.


 Friends, just imagine how intelligent those warriors, who adopted deadly warfare techniques like Chakravyu, a thousand years ago, must have been.











 Friends, all of you will be surprised to know that Chakravyu was just like that storm which used to destroy everything coming in its path like a straw.  Friends, in the Mahabharata period, only the great warriors had the information to penetrate this Chakravyuh. Friends, Arjun's son Abhimanyu only knew how to enter the Chakravyuh. And he knew how to break only a few entrances.  Wah did not know how to break the last door of Chakravyu.  For this reason, the Kauravas had killed the great warrior Abhimanyu by deceit.


 Friends, it is believed that the formation of Chakravyuh in the war made the enemy military so shabby psychologically and mentally.  That in an instant thousands of soldiers gave up their lives.











 Friends, apart from Lord Krishna, Archer Arjuna, Bhishma Pitamah, Guru Dronacharya, Danveer Karna, Ashwatthama and Pradhuman among the great warriors of the Mahabharata period, no one had the strategy to get out of the Chakravyuh.


 You will be surprised to know that the soldiers of Chakravyu could change their position according to the music or the sound of the conch shell. Friends, no commander or soldier could change his position on his own free will.

 Friends, wonderful and unimaginable centuries ago, it was not a common topic to constitute such a scientifically disciplined strategy.


 Friends, it is believed that Chakravyu was formed a total of 3 times in the war of Mahabharata.  In one of which, Yuvraj Abhimanyu was killed. And in one, Arjuna killed Jayadratha by breaking the Chakravyu with the help of Lord Krishna.













 Friends, we should be proud that we all are residents of that Bharatvarsh.  The country where even centuries ago, there was a wonderful confluence of science and technology.


 Friends, the great strategy maze of battle site was "Na Bhooto Na Bhaviti" war technique.


 That is, if friends are seen, no one has seen this war strategy "Chakravyuh" in the past nor will anyone be able to see it in the future.










 Friends, let me tell you that even today a map of Chakravyu remains in a remote dense forest of Madhya Pradesh and a Shiva temple in Karnataka.  Which you can see and be proud of your culture.


 Friends, that's all for today.


 thanks guys


 Mountain Leopard Mahendra🧗🧗


   




          पत्थरों पर उकेरी गई है चक्रव्यूह की संरचना



  























Ek yatra khajane ki khoje me

एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग

          ( एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग )                          www.AdventurSport.com सभी फोटो झारखणड़ के...