Monday, June 29, 2026

एक यात्रा - भगवान गणेश की जन्मस्थली डोडी ताल जहां मौजूद हैं माता अन्नपूर्णा की अद्भुत और अलौकिक मंदिर

Ek yatra khajane ki khoje
























                    माता अन्नपूर्णा की अद्भुत मंदिर 
                               डोडी ताल 
      






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नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको लेकर चल रहा हूं भारत की सबसे पवित्रतम पावन धाम प्रथम पुज्य भगवान गणेश की जन्मस्थली डोडी ताल की यात्रा पर। जहां मौजूद हैं माता अन्नपूर्णा देवी की अलौकिक मंदिर। जहां पूर्ण होती हैं सभी मनोकामनाएं तों तैयार हो जाइए हिमालय पर्वत मालाओं में स्थित भगवान गणेश की जन्मस्थली की रहस्यमई यात्रा पर।


                 
     दोस्तों भगवान गणेश की जन्मस्थली डोडी ताल उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में मौजूद हैं । जहां आप न्यू दिल्ली से बस या टैक्सी की जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। सबसे अच्छा मौसम आपके लिए होगा फरवरी और मार्च का महिना। जिससे की आप बर्फबारी का भी आनंद उठा सकते हैं और दोस्तों इसी महीने में माता अन्नपूर्णा देवी की पवित्र मंदिर की कपाट भी खुलतीं है। जिससे आप माता की अलौकिक दर्शन का लाभ उठा सकते है। 






















            दोस्तों उत्तरकाशी पहुंचने के बाद आपको टैक्सी के द्वारा अगोड़ा गांव पहुंचना होगा। जहां आप एक रात आराम करने के बाद सुबह सुबह भेवरा कैंप के लिए निकलना होगा।
                                  दोस्तों अगोड़ा गांव से आपको पैदल ही खतरनाक पहाड़ियों के बीच से होकर भेवरा बेस कैंप पहुंचना होगा है यहां तक पहुंचने के लिए आपको लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। जब भेवरा पहुंच जाते हों तो वहां बहुत सारे होम स्टे बने हुए हैं जहां आप एक रात आराम से चैन की नींद लें सकते हों। जिससे की आप का शरीर पहाड़ों पर यात्रा करने के अनूकूल बन जाएं। जिससे आप की आगे की यात्रा सुगम हो जाएंगी। 
दोस्तों भेवरा में रात को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में आप भी शामिल हों सकते हैं जो कि वहां के गांव वालों के द्वारा पर्यटकों के लिए आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उस क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिजिए और आराम से अपने रूम में जाकर सो जाईए।







    
               दोस्तों आगे की यात्रा आपकी कठीन होने वाली है क्योंकि आपका अगला पड़ाव माझी होने वाली है जो कि भेवरा से नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दोस्तों जहां आपको एक ही दिन में पहुंचना होगा क्योंकि बीच रास्ते में कोई भी कैंप स्थित नहीं है जहां की आराम कर सकोगे। अतः सुबह जितना जल्दी हो सके आपको माझी के लिए यात्रा शुरू कर देनी होगी ताकि आप समय पर माझी पहुंच जाओ। दोस्तों यात्रा के दौरान आपको पहाड़ों की उंचाई और गहरी खाईयां आपको रोमांचित कर देंगी। और दुर दुर तक बर्फ से ढकी पहाड़ों की खूबसूरती आपकी थकान को मिटा देंगी। दोस्तों भेबरा और माझी के बीच में एक जगह पर पहाड़ों के बीच में मैगी नूडल्स प्वाइंट है जहां पर आप मैगी खाने का आनन्द उठा सकते हैं जिससे आपको काफी मज़ा आयेगा।  









                     दोस्तों मैगी खाने के बाद अब आगे बढ़ते हैं और घने जंगल और गहरी खाईयां आपको रोमांचित कर देंगी और इन्हीं नजारों का आनन्द उठाते हुए आप माझी कब पहुंच जाएंगे आपकों पता ही नहीं चलेगा। चुंकि माझी काफी ऊंचाई पर स्थित है इसलिए आपको थकान भी हो रही होगी। अतः थकान को मिटाने के लिए आप वहां बने स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए ढावे पर वहां की स्थानीय जड़ी बूटियों वाली स्पेशल चाय पी कर आप अपनी थकान दूर कर सकते हैं। और ढाबे वाला द्वारा वहां की स्थानीय रोमांचित कर देने वाली कहानियां को सुनकर डर और रहस्य की कल्पनाओं में गोता लगाने का आनंद उठा सकते हैं। 









                              दोस्तों माझी में आप उसी ढाबे में रात को सोने की भी व्यवस्था कर सकते हैं जहां आपने चाय पी थी।वे लोग रात में आपके लिए खाने पीने की भी व्यवस्था कर देगें। चुंकि काफी ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां रात्रि में काफी तेज हवाएं चलती है और साथ ही साथ बर्फबारी भी काफी तेज होती हैं अतः टेंट की अपेक्षा ढाबा ही काफी सुरक्षित होती हैं यहां रात्रि में ठहरने के लिए। 







              दोस्तों माझी से डोडी ताल की दुरी लगभग 5 से 6 किलोमीटर की है जहां आपको रास्ते में कई झरनें देखने को मिलेगी। ऊंचे ऊंचे पहाड़ियों पर आपको चीड़ और देवदार की वृक्षों पर बर्फ की सफेद चादर यानि वृक्षों पर बर्फ की मोटी परत जमी दिखाई देंगी। चारों तरफ सफेदी ही सफेदी। आपकों ऐसा लगेगा कि आप स्वर्ग में पहुंच गए हों। अद्भूत व अलौकिक नजारा होगी आपके सामने। और आपको यहां से वापस लौटने का मन नहीं करेगा। दोस्तों जब आप माझी से डोडी ताल की ओर  प्रस्थान करेंगे जो रास्ते में आपको बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई मिलेगी जिस पर आप चलेंगे तो आप बार-बार फिसलेंगे गिरेंगे फिर भी आगे बढ़ते रहेंगे। गिरते पड़ते जब आप रास्ते में पड़ने वाले बाबा भैरव नाथ के मंदिर पहुंचेंगे तो आप की सारी थकान दूर हो जाएगी बाबा की कृपा से। और यहां से 2 किलोमीटर की दूरी पर डोडी ताल स्थित है। यहां थोड़ी देर आराम करने के बाद पुनः आप डोडी ताल की ओर प्रस्थान कर जाते हैं।









             दोस्तों अंततः रास्ते का आनंद उठाते हुए आप जब भगवान गणेश की जन्मस्थली डोडी ताल पहुंचते हैं तो वहां की अलौकिक नजारा देखकर आप अचंभित हो जाएंगे। चारों तरफ ऊंची पहाड़ियां बर्फ से ढकी हुई और बीच में गहरी डोडी ताल झील और बगल में ही माता अन्नपूर्णा देवी की अलौकिक मंदिर जो पुरी तरह से बर्फ से ढकी रहती है। की नजारा देखकर आपका मन आनंदित हो उठेगा। और आपके आंखों से खुशी के आंसू निकलने लगेगें जो कि मेरे साथ भी पहली बार हुईं थीं। 

           धन्यवाद दोस्तों यहां पर होम स्टे बने हुए जहां आप कई दिनों तक रुककर और माता अन्नपूर्णा की दर्शन करने के बाद आप वापस लौट सकते हैं। 🙏🙏जय माता दी 🙏 🙏 







🙏🙏 यात्रा में बने रहें 🙏🙏
















Wednesday, June 24, 2026

एक यात्रा - तामिलनाडु के कावेरी नदी पर बना कल्लनई बांध भारत ही नहीं पूरे विश्व की सबसे अद्भुत व प्राचीनतम इंजीनियरिंग का अद्भुत उपलब्धियों में गिना जाता है

Ek yatra khajane ki khoje


 





               कावेरी नदी पर बना कल्लनई बांध 
            
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नमस्कार दोस्तों आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि हमारे भारत वर्ष में विश्व के सबसे प्राचीनतम बांध मौजूद हैं जो कि तामिलनाडु के कावेरी नदी पर बना हुआ है। 
                               दोस्तों तामिलनाडु के कावेरी नदी पर बना कल्लनई बांध यक़ीन मानिए भारत ही नहीं पूरे विश्व की सबसे अद्भुत प्राचीन इंजीनियरिंग की उपलब्धियों में गिना जाता है।







           आपकों जानकार आश्चर्य होगा कि इसका निर्माण लगभग 2000 साल पहले दुसरी शताब्दी ईस्वी में चोल राजवंश के राजा करिकालन ने अपने कार्यकाल में करवाया था। और तब से लेकर आज तक यह बांध उपयोग में है। दोस्तों अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बांध उस समय के इंजीनियरों और मजदूरों द्वारा कितनी मजबूती से बनाया गया होगा।
               दोस्तों उपलब्ध प्राचीन व ऐतिहासिक रिकॉर्ड और पुरातात्विक संदर्भ और जल प्रबंधन इतिहास के आधार पर यह दावा मुख्य रूप से सही माना जाता है। कि यह बांध विश्व की सबसे प्राचीनतम बांध है। 








          दोस्तों कल्लनई बांध जिसे Grand Ani cut भी कहा जाता है तामिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के पास कावेरी नदी पर बना हुआ है। दोस्तों माना जाता है कि इसका निर्माण चोल राजवंश के शासक करिकालन ने अपने कार्यकाल में करवाया था। इतिहासकार आम तौर पर इसे दुसरी शताब्दी ईस्वी के आस पास का मानते हैं। यानी इसकी उम्र लगभग 1800 से 2000 के बीच मानी जाती है। यही वजह की इसे दुनिया की सबसे पुरानी water regulation structures में शामिल किया जाता है।






     दोस्तों यह कोई आधुनिक कांक्रीट का बना बांध नहीं था  बल्कि पत्थरों से बना हुआ एक Diversion structure  था। जिसका उद्देश्य नदी के पानी को सिंचाई के लिए अलग-अलग दिशाओं में भेजना था। 

           ताकि किसानों को समय पर खेती के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। जिसका फायदा आज हजारों साल बाद भी तामिलनाडु के किसान उठा रहे हैं। 🙏🙏


 🙏🙏  धन्यवाद दोस्तों यात्रा में बने रहें 🙏🙏
















             

  

Sunday, June 21, 2026

एक यात्रा - अद्भुत है वह महज़ चार इंच की है उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं है ।वह नाचती हैं जिसपर पुरी दुनिया उसे सलाम करतीं हैं

Ek yatra khajane ki khoje










It is approximately 4 inches tall and is roughly 4,500 years old.
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अद्भुत एवं अनोखी रहस्यमई केवल एक  इंच लम्बी नाचने वाली लड़की जिसके पीछे पड़ा है पाकिस्तान। उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं है 
वह नाचती हैं जिसपर पुरी दुनिया उसे सलाम करतीं हैं मगर पाकिस्तान के लोगो को यह बेहद नागवार गुजरती हैं । इसलिए पहले तो उन लोगो ने इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज को ठुकरा दिया था। लेकिन अब वही लोग इसके वैश्विक महत्व को जानने के बाद इसे प्राप्त करने के लिए एड़ी-चोटी का दम लगाएं हुए हैं।







        मगर भारत ने उस नाचने वाली लड़की को बहुत ही सहेज कर रखा है और वह किसी भी हाल में इस पुरातात्विक खोज को पाकिस्तान को देना नहीं चाहता है 
     
  जानते हो क्योंकि हमारे देश भारत ने इसे इज्जत बख्शी, अपने यहां के किताबों में सिलेबस के रूप शामिल किया । जिसके कारण से वह अब पुरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर रही है। 
                इस नाचने वाली लड़की की मूर्ति खोज मोहनजोदड़ो से अंग्रेजों ने 20 वीं सदी में की थी। और नाम दिया था द डांसिंग गर्ल ।







        दोस्तों हाल ही में इसे तब लेकर विवाद हो गया ।जब NCERT  की क्लास 9 की किताब में डांसिंग गर्ल के ऊपरी हिस्से को ढका हुआ दिखाया गया था। लेकिन विवाद बढ़ने पर इसे फिर जैसी मूर्ति है वैसी ही छाप दी गई। 

   🙏🙏 धन्यवाद दोस्तों यात्रा में बने रहें 🙏🙏










       भारत की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक 

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Saturday, June 20, 2026

रायगढ़ किला, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है,

Ek yatra khajane ki khoje











रायगढ़ किला, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है,

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रायगढ़ किला, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है, जो सह्याद्रि पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ियों पर बना हुआ है। यह किला अपनी भव्य वास्तुकला, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।






वर्ष 1674 में यहीं पर छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। किले में राजमहल के अवशेष, जगदीश्वर मंदिर, बाजार क्षेत्र और शिवाजी महाराज की समाधि आज भी देखने योग्य प्रमुख स्थल हैं।










बादलों से घिरा यह दुर्ग इतिहास, साहस और अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। रायगढ़ किला महाराष्ट्र आने वाले हर इतिहास और प्रकृति प्रेमी के लिए एक खास आकर्षण है।






        🙏🙏 धन्यवाद आप सभी का हमारे ब्लॉग मे हार्दिक अभिनंदन है 🙏🙏



















Ek yatra khajane ki khoje me

एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग

          ( एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग )                          www.AdventurSport.com सभी फोटो झारखणड़ के...