⚰️⚰️📜📜2000 साल पहले भी होता था भारत-मिस्र में व्यापार, कब्रों में खुदे मिले तमिल-संस्कृत लिपियों में व्यापारियों के नाम: विदेशी शोधकर्ता भी हैरान, बताया- ये असाधारण खोज🔎🔎🔮🔮
मिस्र के कब्र में दफ़न भारतीय व्यापारियों के नाम
📝📝मिस्र के ‘वैली ऑफ किंग’ नाम की प्राचीन कब्रों से 30 शिलालेख मिले हैं, जो लगभग 2000 साल पुराने हैं। इन शिलालेखों में भारत और मिस्र के बीच व्यापार और संपर्क की जानकारियाँ हैं। 📝📝
📝📝इन शिलाओं पर लिखे शब्द तमिली (प्राचीन तमिल-ब्राह्मी) और प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में हैं, जो यह साबित करते हैं कि उस समय भारतीय उपमहाद्वीप के लोग मिस्र आते-जाते थे।🗺️🗺️
📜📜मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये शिलालेख 6 अलग-अलग रॉक-कट कब्रों में मिले हैं। इनमें से 20 शिलाएँ तमिली में और बाकी 10 शिलाएँ संस्कृत और प्राकृत में हैं।⚰️⚰️
🚸🚸 इसका मतलब यह है कि केवल दक्षिण भारत के ही नहीं बल्कि भारत के उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी हिस्सों से भी लोग मिस्र जाते थे। 🚸🚸
📜📜विशेष रूप से प्राचीन राजधानी थेब्स के भीतर स्थित राजाओं की घाटी में, जहाँ पहले से तीसरी ईस्वी के बीच मसालों और अन्य वसतुओं का व्यापार होता था।🧭🧭
✍️✍️इस खोज की जानकारी स्विट्जरलैंड की लॉजेन यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ स्लाविक एंड साउथ एशियन स्टडीज (SLAS) के प्रोफेसर इंगो स्ट्राउच और फ्रांस के पेरिस स्थित EFEO की प्रोफेसर शार्लोट श्मिड ने दी है। ✍️✍️
✍️✍️उन्होंने बुधवार (11 फरवरी 2026) को तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) द्वारा तमिल शिलालेखों पर आयोजित सम्मेलन में यह जानकारी दी। ✍️✍️
🕵️इस कार्यक्रम में दुनियाभर के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए थे, जहाँ इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज को पहली सार्वजनिक रूप से बताया गया।✍️✍️
Ek Yatra khajane ki khoj me

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