Wednesday, March 25, 2026

2000 साल पहले भी होता था भारत-मिस्र में व्यापार, कब्रों में खुदे मिले तमिल-संस्कृत लिपियों में व्यापारियों के नाम: विदेशी शोधकर्ता भी हैरान, बताया- ये असाधारण खोज🔎🔎🔮🔮

Ek yatra khajane ki khoj



⚰️⚰️📜📜2000 साल पहले भी होता था भारत-मिस्र में व्यापार, कब्रों में खुदे मिले तमिल-संस्कृत लिपियों में व्यापारियों के नाम: विदेशी शोधकर्ता भी हैरान, बताया- ये असाधारण खोज🔎🔎🔮🔮




मिस्र के कब्र में दफ़न भारतीय व्यापारियों के नाम

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📝📝मिस्र के ‘वैली ऑफ किंग’ नाम की प्राचीन कब्रों से 30 शिलालेख मिले हैं, जो लगभग 2000 साल पुराने हैं। इन शिलालेखों में भारत और मिस्र के बीच व्यापार और संपर्क की जानकारियाँ हैं। 📝📝


📝📝इन शिलाओं पर लिखे शब्द तमिली (प्राचीन तमिल-ब्राह्मी) और प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में हैं, जो यह साबित करते हैं कि उस समय भारतीय उपमहाद्वीप के लोग मिस्र आते-जाते थे।🗺️🗺️


📜📜मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये शिलालेख 6 अलग-अलग रॉक-कट कब्रों में मिले हैं। इनमें से 20 शिलाएँ तमिली में और बाकी 10 शिलाएँ संस्कृत और प्राकृत में हैं।⚰️⚰️


🚸🚸 इसका मतलब यह है कि केवल दक्षिण भारत के ही नहीं बल्कि भारत के उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी हिस्सों से भी लोग मिस्र जाते थे। 🚸🚸






📜📜विशेष रूप से प्राचीन राजधानी थेब्स के भीतर स्थित राजाओं की घाटी में, जहाँ पहले से तीसरी ईस्वी के बीच मसालों और अन्य वसतुओं का व्यापार होता था।🧭🧭


✍️✍️इस खोज की जानकारी स्विट्जरलैंड की लॉजेन यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ स्लाविक एंड साउथ एशियन स्टडीज (SLAS) के प्रोफेसर इंगो स्ट्राउच और फ्रांस के पेरिस स्थित EFEO की प्रोफेसर शार्लोट श्मिड ने दी है। ✍️✍️


✍️✍️उन्होंने बुधवार (11 फरवरी 2026) को तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) द्वारा तमिल शिलालेखों पर आयोजित सम्मेलन में यह जानकारी दी। ✍️✍️


🕵️इस कार्यक्रम में दुनियाभर के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए थे, जहाँ इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज को पहली सार्वजनिक रूप से बताया गया।✍️✍️



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Tuesday, March 24, 2026

दोस्तों वहीं तारें वहीं आकाश बस दोस्तों समय के साथ नजर बदल गई हैं

Ek yatra khajane ki khoje







समय बदल गया सभ्यताओं का स्वरूप बदल गया 

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तारें वहीं मौजूद हैं और आकाश भी वहीं मौजूद हैं 🌠🌫️

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वही तारे, वही आकाश—बस नज़र बदल गई।




एक तरफ रामसेस 5th के मकबरे की छत पर बना 3000 साल पुराना आकाशगंगा का चित्रण है, और दूसरी तरफ आज की अत्याधुनिक एस्ट्रोफोटोग्राफी। समय के इस विशाल अंतर के बावजूद, ब्रह्मांड की विशालता को समझने की हमारी तड़प आज भी कायम है। प्राचीन मिस्रवासियों ने जिसे अपनी दीवारों पर उकेरा, आज हम उसे लेंस के माध्यम से सच होते देख रहे हैं।








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Monday, March 23, 2026

👰 दिल्ली की उजाड़ दुल्हन क्रिस्टल ताबूत में। क्या यह सच्ची घटना थी?

Ek yatra khajane ki khoje

 











 

🫅👰दिल्ली की उजाड़ दुल्हन क्रिस्टल ताबूत में… अब भी अपने अनुष्ठानिक वस्त्रों में लिपटी(नई दिल्ली, 1912)👰

👰प्रस्तावना: क्या आपने कभी सोचा है कि शादी का जोड़ा पहने हुए एक युवती का शव, सौ से अधिक वर्षों तक एक चमकदार क्रिस्टल के ताबूत में सुरक्षित कैसे रह सकता है? क्या यह केवल एक पागल वैज्ञानिक का प्रयोग था या किसी ऐसी प्राचीन बुराई का द्वार, जो आज भी दिल्ली की पुरानी गलियों के नीचे सांस ले रही है? यह कहानी केवल एक 'दुर्भाग्यपूर्ण दुल्हन' की नहीं है, बल्कि उस अंधेरे की है जिसे विज्ञान ने छूने की कोशिश की और खुद राख हो गया।😢

🧛{ 1912: दिल्ली की दो दुनिया और एक रहस्यमयी पत्र}🧟

🧑‍🎄अक्टूबर 1912 की वह सर्द रात थी। ब्रिटिश राज की नई राजधानी दिल्ली अभी निर्माण के दौर से गुजर रही थी। एक तरफ एडविन लुटियंस की नई दिल्ली अपनी भव्यता ले रही थी, तो दूसरी तरफ पुरानी दिल्ली यानी शाहजहानाबाद की संकरी गलियां सदियों के राज दबाए बैठी थीं।🧛🧟

👮उस समय के सबसे अनुभवी पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर रघुनाथ सिंह को एक गुमनाम पत्र मिला। पत्र की लिखावट कांपती हुई थी, जैसे उसे लिखने वाला मौत के करीब खड़ा हो। पत्र में लिखा था:😢

"🙂जो दुल्हन कभी शादी नहीं कर पाई, वह अब भी इंतज़ार कर रही है। चांदनी चौक से तीन गली आगे, नीले दरवाज़े वाली हवेली... तहखाने में वह क्रिस्टल में है। वह देख रही है।"😢



🙂रघुनाथ सिंह ने इसे मज़ाक समझा, लेकिन जब उन्होंने अपने सहयोगी कांस्टेबल मुकुंद लाल को यह दिखाया, तो मुकुंद का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने कांपते हुए कहा, "साहब, इस हवेली को लोग 'अंधेरे का घर' कहते हैं। मेरी दादी कहती थीं कि यहाँ कुछ बहुत बुरा हुआ था।"😢

[. नीले दरवाजे की हवेली और तहखाने का राज]

😾19 अक्टूबर, सूर्यास्त से ठीक पहले, रघुनाथ सिंह और उनकी टीम उस हवेली के सामने खड़ी थी। मुगल और औपनिवेशिक वास्तुकला का वह अजीब मिश्रण डरावना लग रहा था। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, एक ऐसी हवा बाहर निकली जैसे घर ने आखिरी सांस छोड़ी हो। हवा में सीलन और किसी पुराने विदेशी इत्र की गंध थी।😢

🙂जब वे तहखाने की ओर बढ़े, तो सीढ़ियां पत्थर की बनी थीं और हर कदम पर एक खोखली गूंज पैदा करती थीं। नीचे का तापमान ऊपर से कहीं ज्यादा कम था। वहां एक भारी लोहे का दरवाजा था, जिस पर जंग तो लगी थी, लेकिन ताला एकदम नया था।😢

😾जब ताला तोड़ा गया, तो जो मंजर सामने था उसने सबकी रूह कंपा दी। कमरे के बीचों-बीच एक क्रिस्टल का ताबूत रखा था। वह पारदर्शी था और उसके अंदर एक दुल्हन लेटी थी—लाल रेशमी लहंगा, भारी सोने के आभूषण, हाथों में ताजी रची मेहंदी और माथे पर बिंदी। उसका चेहरा एक बेहद महीन घूंघट से ढका था। सबसे डरावनी बात यह थी कि 100 साल बाद भी शरीर सड़ा नहीं था। वह ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी-अभी सोई हो।😢




😾. डॉ. एडवर्ड ब्लैकवुड: विज्ञान या पागलपन?😢

😾वहां मिली अलमारियों से रघुनाथ सिंह को दर्जनों किताबें और दस्तावेज मिले। उनमें से एक थी डॉ. एडवर्ड ब्लैकवुड की डायरी (1909-1912)। ब्लैकवुड एक ब्रिटिश डॉक्टर था जो मौत की प्रक्रिया को रोकने के प्रयोग कर रहा था।😢

😌उसकी डायरी के पन्ने किसी शैतानी योजना की गवाही दे रहे थे:😾

[(जुलाई 1910: उसने लिखा कि उसने हिमालय के योगियों और तिब्बत के लामाओं से शरीर को संरक्षित रखने की विधि सीखी है।)]👰👰🧟🧟😢😢





Wednesday, March 18, 2026

घुमक्कड़ पर्वतारोही महेंद्रा (travel with Mahendra vlogs)

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एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग

          ( एक यात्रा माउंटेन लेपर्ड महेन्द्रा के संग )                          www.AdventurSport.com सभी फोटो झारखणड़ के...